Hello friends,
Most of you must be knowing the famous serial, "Sarabhai vs Sarabhai." Using the characters of the serial, I have tried to write an entirely new episode. Hope you will like it...
Sarabhai vs Sarabhai - Monisha Goes Missing...
सीन १ - माया के घर का ड्रॉईंग रूम...
दोपहर का वक्त है | इंदू पेपर पढ़ रहा है | तभी रोसेश उसके कमरे से बाहर निकलता है...
रोसेश: नाचे मन मोरा मदन दिग धा धिगी धिगी...
इंदू: ओए पार्ट टू... वह मदन नहीं मगन है... मदन तो मैं था "देख भाई देख" में... वैसे क्यौं नाच रहा है तेरा मन... सच सच बता... कोई मिल गयी क्या...
रोसेश: ऐसा कुछ नहीं डॅड, कल मधूफूफा यह गाना सुन रहे थे | मुझे अच्छा लगा, तो मैं भी गुनगुनाने लगा...
इंदू: क्या... वह बहरेलाल गाना सुन रहे थे...
रोसेश: डॅड, अब वह बहरे नहीं हैं ओके | दुश्यंत ने उन्हें नया हियरिंग डिवाईस लाकर दिया है | मेड इन जर्मनी...
इंदू: अरे दुश्यंत मेरे लाल... क्या ग़ज़ब का सही काम किया है तूने... अब हैं हैं हैं हैं से तो छुटकारा मिलेगा...
तभी माया अंदर आती है...
माया: हाय बॉईज... अच्छा तुमने मॉनिशा को देखा है...
इंदू और रोसेश दोनों सिर हिलाकर नहीं कहते हैं...
माया: आज सुबह से मॉनिशा नज़र नहीं आ रही...
रोसेश: गई होगी मॉनिशा भाभी गंगुराम के पास टूथपेस्ट खरीदने या घसीटाराम से छोले भतुरे लेने...
माया: नहीं ना... मैंने सिक्यूरिटी को भेजा था | पता चला मॉनिशा कल से उनकी दुकान पर नहीं गई | मुझे तो टेन्शन होने लगी है...
रोसेश: आपको टेन्शन होने लगी मॉमा...
इंदू: नॅच्यूरली रोसेश... सुबह से मॉनिशा मुरदाबाद एक्सप्रेस चली नहीं ना, टेन्शन तो होगी ही...
माया: ओ स्टॉप इट इंद्रवदन...
तभी बाहर से मधुभाई अंदर आते हैं...
मधुभाई: ए इंदू, इस मॉनिशा को क्या हुआ...
इंदू: क्या... आपने मॉनिशा को देखा...
मधुभाई: साकीनाका... ना रे, यह तो कफ परेड है...
इंदू: (रोसेश की ओर देखते हुए...) नालायक, नपावड़... अपने बाप से झूठ बोलते हुए शरम नहीं आयी तुझे...
रोसेश: प्रँक था डॅड | यह गाना कल टि.व्ही.पर चल रहा था...
मधुभाई: हैं...
इंदू: माया, देखो ना...
माया: (मधुभाई को मॉनिशा की तस्वीर दिखाकर आँखों की तरफ इशारा करते हुए...) मधुभाई... मधुभाई... आपने मॉनिशा को... देखा...
मधुभाई: मैंने मॉनिशा को देखा... हां देखा ना... नीचे बच स्टॉप पर खड़ी थी | मेरे वहां पहुँचने से पहले वह बस में बैठकर चली गई | कुछ उदास और परेशान थी वह...
माया: बस में... ओह दॅट इज टू मिडल क्लास... पर गई कहां वह...
तभी साहिल दरवाजा धकेलकर अंदर आता है | वह गुस्से में लाल-पीला हो रहा है...
साहिल: इन्नफ इज इनफ...
माया: साहिल, क्या हुआ बेटा...
साहिल: मॉम, मॉनिशा जैसी गैरजिम्मेदार और पैसों की लालची लड़की मैंने आजतक नहीं देखी...
रोसेश: वॉट आर यू सेईंग साहिल भाई... ऐसा क्या किया मॉनिशा भाभीने...
साहिल: फोर्थ फ्लोरवाले मि. वाडिया हैं ना, उन्हें मेरी कोयोटे की राइड चाहिए थी | मैंने मना किया था, लेकिन मॉनिशा ने दस मिनट के हज़ार रुपए की बोलीपर चाबी उनके हाथे में दे दी | और उस वाडिया के बच्चे ने गाडी की दोनों टेल लाईट्स तोड़ दी | मैं उस वाडिया से रिफंड की बात ही कर रहा था, कि मॉनिशा ने उसके सामने कह दिया, "कोई बात नहीं साहिल, नेक्ट टाईम तुम इनकी फियाट चला लेना, और उसके टेल लाईट तोड़ देना | हिसाब फिट्टूस..."
माया: ओह मॉनिशा... Atleast scores are settled तो कहा होता... हिसाब फिट्टूस इज जस्ट सो डाऊन मार्केट... एनीवेज, साहिल, अब कहां है वह...
साहिल: मॉम, इस बात के लिए मैंने उसे खूब डाँटा और वह घर छोड़कर चली गई... अच्छा हुआ चली गई... आय थिंक इट्स ऑल ओव्हर मॉम...
सीन १ खत्म हुआ...
सीन २ - फिरसे माया के घर का ड्रॉईंग रूम...
शाम का वक्त है | इंद्रवदन, मधूभाई और सोनिया सोफेपर बैठे हैं | माया इधर से उधर टहल रही है और बार-बार दरवाजे की ओर देख रही है | तभी दुश्यंत और रोसेश वहां आते है...
दुश्यंत: मॉम, मॉनिशा को जिस बस में चढ़ते हुए मधू अंकल ने देखा, वह बस खाऊ गल्ली जाती है…
माया: खाऊ गल्ली... What is this मॉनिशा... तुम सबकी नजरें बचाकर के गई भी तो खाऊ गल्ली...
रोसेश: नहीं मॉमा... मॉनिशा भाभी वहां पहुँची ही नहीं...
दुश्यंत: हां मॉम... हमने बस कंडक्टर से बात की है | उसने कहा, कि मॉनिशा बस में चढ़ी तो थी, लेकिन अगले ही स्टॉपपर उतर गई...
रोसेश: हां मॉमा, और मॉनिशा भाभीने तो स्टॉप आने का वेट भी नहीं किया | चलती बस से कूदी भाभी | यह देखकर ड्रायव्हर ने जोर से ब्रेक भी लगाए...
दुश्यंत: डोंट वरी मॉम... बस को कुछ नहीं हुआ... टायर्स थोडे घिस गए हैं... आय विल एक्सप्लेन... मान लो, कि रोसेश बस है... और...
माया: ओ स्टॉप इट दुश्यंत...
इंदू: माया, अगर मॉनिशा वहीं उतरी है जहां यह दोनों बता रहे हैं, तब तो बड़ी गड़बड़ है...
सोनिया: क्यौं डॅड...
इंदू: वहीं पर तो उस हरी और मदन का दारू का अड्डा था, जो माया ने बंद करवाया था...
दुश्यंत: उसके बाद ही तो रोसेश भी किडनॅप हुआ था | डॅड ने बारगेन कर के पच्चीस लाखपर सेटलमेंट की थी...
माया: लेकिन वह पैसे लेकर के दोनों Indonesia भाग गए थे ना...
रोसेश: हां, लेकिन पिछले हफ्ते ही दोनों वापस आ गए मॉमा... मदन ने मुझे गेट वे पर ली हुई फोटो भी WhatsAppपर भेजी है...
माया: तुम ऐसे लोगों के contact में हो रोसेश... How illegally disgusting...
इंदू: अरे माया, इस चंबू को छोड़ो... मैं तो सोच रहा हूँ, कहीं रोसेश की फेल हुई किडनॅपिंग का बदला लेने के लिए हरी और मदन ने मॉनिशा को तो किडनॅप नहीं किया ना...
मधूभाई: हैं...
यह सुनकर माया सिर के उपर हाथ रखती है | फिर रोसेश और सोनिया की तरफ देखकर कहती है...
माया: ओ माय गॉड... रोसेश... जल्दी से साहिल को बुलाकर ले आओ... हमें कुछ करना होगा... सोनिया तुम्हारे वूडू डॉल्स क्या कहते है देखो ना...
इंदू: माया, तुम इतनी परेशान क्यौं हो रही हो... मॉनिशा का घर छोड़कर जाना तुम्हारे लिए तो खुशी की बात है ना...
माया: हां वह तो है... But the point is मॉनिशा किसी को बिना कुछ बताए गई है | आय मिन, अगर मुझे कहकर जाती तो मैं क्या रोकनेवाली थी उसे | वह जाना चाहती थी तो बताकर तो जाती | इतनी टेन्शन तो ना होती मुझे...
तभी सोनिया अपना वूडू बोर्ड खोलकर उसपर कुछ देखती है | फिर एक डॉल को कान से लगाकर कहती है...
सोनिया: सायलंस... वूडू चार्ट बोल रहा है... भाभी किसी ऐसी जगह है जहां आस-पास कुछ ठंड़ा ठंड़ा है | भाभी बार बार अपना मुँह खोल रही है और बंद कर रही है...
मधूभाई: ए सोनिया, तुम ऐसे आँखे घुमाकर होंठ क्यौं हिला रही हो...
इंदू: मधूभाई, सोनिया बता रही है मॉनिशा कहां होगी...
मधूभाई: मॅगी... यहां मॉनिशा गायब है और तुझे खाने की पड़ी है... अरे मॉनिशा के बारे में सोच बेवकूफ...
इंदू: बहरे आप हैं... मैं क्या कह रहा हूँ उसे आप नहीं समझते... और बेवकूफ मुझे कह रहे हैं...
मधूभाई: देखा सोनिया... फिर से अगडम् बगडम् बोलना शुरू कर दिया इसने...
माया: ओ स्टॉप इट बोथ ऑफ यू... लेकिन ठंड़ा ठंड़ा मतलब...
दुश्यंत: आईस... आईस के क्यूब्स पर लिटाया होगा मॉनिशा को...
इंदू: और मुँह बार बार खोलना मतलब...
दुश्यंत: Torture… “बचाओ बचाओ” ऐसे चिल्ला रही होगी मॉनिशा...
इंदू: शुभ शुभ बोलो दुश्यंत... अबे ओ हरी और मदन... अगर मॉनिशा को कुछ हुआ ना, तो मैं...
तभी दरवाजेपर एक आवाज आती है...
आवाज: हॅलो एव्हरीबडी...
सीन २ खत्म हुआ...
सीन ३ - फिरसे माया के घर का ड्रॉईंग रूम...
सब लोग आवाज की ओर देखते हैं | दरवाजे पर दो लोग खड़े हैं | एक ने गुलाबी रंग की पँट और पीले रंग की शर्ट पहनी है, तो दूसरे ने गुलाबी शर्ट और पीली पँट पहनी है | काले रंग के बड़े बड़े सन ग्लासेस पहने दोनों हँस रहे हैं...
माया: तुम दोनों कौन हो, और यहां क्या कर रहे हो...
मधूभाई: ए इंदू, यह सर्कस के जोकर की तरह कपड़े पहने हुए लोग कौन हैं...
इंदू: मुझे क्या मालूम...
मधूभाई: सलून... इस वक्त सलून जाना है तुझे...
इंदू: अरे क्यौं परेशान कर रहे हो मेरे बाप...
माधूभाई: साँप... कहां है साँप...
इंदू: (उन लोगों की तरफ देखकर...) अरे तुम लोग बताते क्यौं नहीं कौन हो तुम... कम से कम यह पंचायतीलाल तो चुप रहेंगे...
दोनों अपने सन ग्लासेस उतार देते हैं | तभी रोसेश वहां आता है | उन्हें देखकर रोसेश की आँखें बड़ी हो जाती हैं, और उसके चेहरे पर मुस्कान आती है | आगे बढ़कर वह दोनों से हाथ मिलाता है...
रोसेश: ओ माय गॉड... हरिभाई और मदन...
हरिभाई: सही पहचाना | हम इंडोनेशिया से वापस आ गए | अब यही रहकर हमारे धंधे को आगे बढ़ाएँगे...
मदन: रोसेश, कविता लिखना चालू है ना... मैंने भेजी हुई कविता पढ़ी...
रोसेश: पढ़ी... थँक यू मदन... यू आर सो स्वीट...
इंदू: ओहो, तभी तू वह गाना गा रहा था पार्ट टू... तुझे पता था ना यह दोनों आज आनेवाले हैं...
माया: अरे वह सब छोड़ो... हरी और मदन... बताओ मॉनिशा कहां है...
हरिभाई: मॉनिशा कहां है हमको क्या मालूम... हम तो पिक्चर देखने गए थे, "हमार कमरे में तोहार बेटी..."
मदन: हां, और उस पिक्चर में एक किडनॅपिंग सीन देखकर रोसेश की याद आई | इसलिए उससे मिलने आए हमलोग...
उन्हे देखकर मधूभाई इंद्रवदन की पीठपर हाथ मारते है...
मधूभाई: ए इंदू... यह लोग कौन है बता ना...
इंदू: यह मदन और हरी हैं...
मधूभाई: जरी... ना रे ना... यह तो टेरिकॉट की शर्ट है...
इंदू: अबे बहरेलाल यह शर्ट नहीं इंसान हैं...
मधूभाई: जापान से... तो यह दोनों जापान से आए...
इंदू: (हरी और मदन के सामने हाथ जोड़कर...) मैं तुम दोनों से हाथ जोड़कर गुज़ारीश करता हूँ, कि इन्हें किडनॅप करके कहीं दूर ले जाकर बंद कर दिजिए...
मधूभाई: हैं...
तभी सोनिया हाथ में वूडू डॉल लेकर दरवाजे तक आती है...
सोनिया: मॉम... मॉनिशा भाभी अब एक फोर व्हीलर के सामने है और उनकी आँख से आँसू निकल रहे हैं...
दुश्यंत: कौनसी फोर व्हीलर... ऑटोमॅटिक या विंटेज...
माया: उससे क्या फर्क पड़ता है दुश्यंत...
दुश्यंत: फर्क पड़ता है मॉम... आय विल एक्सप्लेन... रोसेश यहां आओ... मान लो के रोसेश रास्ता है और...
माया: ओ कट इट आऊट दुश्यंत... और तुम सब लोग गलत-सलत बोलना बंद करो...
यह कहकर माया सीधी अपने कमरे में चली जाती है | दरवाजा बंद करके उसपर पीठ टिकाकर अपने आप से बातें करने लगती है...
माया: मॉनिशा बेटा... कहां हो तुम... तुममें लाख बुराइयाँ सही, लेकिन तुम मेरी बहू हो | मुझे समझनेवाली एक तुम ही हो... अब मैं किसकी बुराई करूँगी, किसकी गलतियाँ निकालूँगी, किसे ताने मारूँगी... अगर हरी और मदन ने मॉनिशा को किडनॅप नहीं किया तो वह किसी दूसरी मुसीबत में हो सकती है | मुझे साहिल के पास जाना होगा...
माया कमरे से बाहर निकल आती है | सब उसकी तरफ देख रहे हैं |
माया: हमें मॉनिशा को ढूँढ़ना होगा | पता नहीं वह कहां होगी... मैं साहिल के पास जा रही हूँ...
इतना कहकर माया दरवाजे की ओर दौड़ती है | सब माया के पीछे हैं लेकिन माया तेजी से घर के बाहर निकल जाती है | माया साहिल के घर की बेल बजाती है | दरवाजा खुल जाता है...
सीन ३ खत्म हुआ...
सीन
४ - साहिल के घर का ड्रॉईंग रूम...
इंद्रवदन, मधूभाई और सोनिया सोफे पर बैठे हैं | दुश्यंत सी.डी. प्लेयर को चेक करने में जुटा हुआ है | साहिल, माया और रोसेश किचन के पास खड़े हैं…
माया: साहिल, हमें पुलीस स्टेशन जाना होगा...
साहिल: मॉम मॉम मैंने इंस्पेक्टर स्वामी से बात की है | वह मॉनिशा को ढूँढ़ने में हमारी मदद करेंगे...
तभी साहिल की नज़र दरवाजे में खड़े हरी और मदन की ओर जाती है...
साहिल: अरे, मदन और हरी... तुम लोग कब आए...
रोसेश: यह दोनों इंडिया वापस आ गए हैं साहिल भाई | मुझसे मिलने आए है यहां...
इंदू: अबे चंबू, मॉनिशा के बारे में सोच इडियट...
मधूभाई: डायट... मॉनिशा डायट करने लगी है... लेकिन क्यौं...
माया: माय गॉड तुम लोग यह क्या बातें कर रहे हो... साहिल, मॉनिशा को...
तभी फोन की घंटी बजती है | माया फोन उठाती है...
माया: हॅलो, साराभाईज रेसि... मॉनिशा का घर... येस... कौन रामप्यारे... हां हां सेवपूरीवाले भैया... हां बोलिये... अच्छा... लेकिन अब क्या फायदा... जिसके लिए आपने फोन किया है, वह तो अब... बेटर लक नेक्ट टाईम भैया...
माया फोन काट देती है | सब लोग माया की ओर देखते हैं...
माया: रामप्यारे भैया का फोन था | वही, जिसकी पानीपूरी खाकर जाँडीस होता है | वह कह रहा था, उसने अपने रेग्यूलर कस्टमर्स के लिए आज एक घंटे के लिए स्कीम निकाली है | दो प्लेट सेवपूरी के साथ एक प्लेट सेवपूरी फ्री | इस स्कीम की शुरूवात वह मॉनिशा से करना चाहता है और अपना ठेला लेकर के वह बिल्डिंग के बाहर खड़ा है | लेकिन मॉनिशा तो... इसलिए वह जा रहा है, किसी दूसरे के साथ स्कीम की शुरुवात करने...
तभी बेडरूम का दरवाजा खुलता है और मॉनिशा चिल्लाते हुए बाल्कनी की तरफ भागती है...
मॉनिशा: अरे भैयाजी... रुकिये... मैं यहीं हूँ...
मॉनिशा बाल्कनी से झाँकती है | फिर धीरे धीरे मुड़ती है और साहिल के पास आकर खड़ी हो जाती है...
मॉनिशा: मेरी कोशिश बेकार गई... साहिल, तुमने बताया ना...
माया: नहीं | इस बार भी मैं ही समझ गई... हमेशा की तरह यहां हॉल में कपड़ों का exhibition नहीं लगा था, इसका मतलब मॉनिशा वहीं कपड़े लेकर के use कर रही थी | किचन शेल्फपर वड़ा-पाव के पॅकेट रखे हुए हैं | साहिल मॉनिशा से कितना ही प्यार क्यौं ना करता हो, लेकिन अकले में वह वड़ा-पाव ज़रूर नहीं खाएगा | And and... शादी से पहले मॉनिशा की सिर्फ बात करते वक्त रोनेवाला मेरा साहिल, आज मॉनिशा के गायब होनेपर भी calm था, composed था | तब मुझे यकीन हो गया, कि दाल में कुछ... मेरा मतलब है शीरे में कुछ गरम मसाला है... और मॉनिशा बेटा, से द प्लॅन हॅज फेल्ड... कोशिश बेकार हो गई कहना इज टू डाऊन मार्केट... इसलिए मैंने फोन का नाटक किया...
मधूभाई: ए इंदू, यह रही मॉनिशा | पर यह तो घर पर ही है... फिर मैंने जिसे बस में चढ़ते हुए देखा वह कौन थी...
दुश्यंत: वह कौन थी... नाईस मूव्ही... ब्लॅक एँड व्हाईट थी | अगर कलर में होती तो इतना इफेक्ट नहीं आता... आय विल एक्सप्लेन... मान लो, कि रोसेश...
माया: ओह कट इट आऊट दुश्यंत | मॉनिशा बेटा, अब बता भी दो व्हॉट्स द कॅच...
मॉनिशा: मुझे माफ कर दिजिए मम्मीजी | डॅडीजी के साथ लगी एक शर्त की वजह से मुझे यह सब करना पड़ा...
फ्लॅशबॅक शुरू होता है...
फ्लॅशबॅक - सीन ५ - मॉनिशा का घर...
मॉनिशा किचन में कुछ बना रही है | साहिल सोफे पर बैठा पेपर पढ़ रहा है | तभी इंद्रवदन वहां आता है...
इंदू: हाय मॉनिशा... क्या बना रही हो...
मॉनिशा: हाय... खीर बना रही हूँ | साहिल आज घर पर है ना, तो सोचा कुछ मीठा बना लूँ | जरा टेस्ट कर के बताइये ना कैसी बनी है...
साहिल: (धीमी आवाज में...) मर गए...
दो छोटे बाऊल में खीर डालकर मॉनिशा बाऊल को टेबल पर रखती है | इंदू और साहिल किचन के पास जाते हैं और बाऊल में झाँकते हैं...
इंदू: लेकिन मॉनिशा, इस खीर का रंग लाल क्यौं है...
मॉनिशा: वह, केसर डाला है ना... तो उसका लाल रंग आया होगा...
तभी इंद्रवदन टेबल पर पड़े लाल मिर्च के खाली पॅकेट को देखकर चौंक जाता है | फिर थोड़ी खीर टेस्ट करता है | चम्मच मुँह में ही रखकर इशारे से पानी माँगता है | पूरे दो ग्लास पानी पीने के बाद...
इंदू: हाश... मॉनिशा, तुमने इस खीर में लाल मिर्च के पावडर का पूरा पॅकेट उड़ेल दिया क्या...
मॉनिशा: क्या... मैंने तो केसर समझकर...
इंदू: केसर समझकर लाल मिर्च का पावडर... वाह...
मॉनिशा: हां | मेरी गुरिंदर मौसीने पिछले हफ्ते केसर भेजा था ना... कोई डिब्बा खाली नहीं था | इसलिए मैंने केसर को लाल मिर्च की पावडर के खाली पॅकेट में भरकर पॅकेट फ्रिज में रख दिया...
कहते कहते मॉनिशा फ्रिज खोलती है और दरवाजे में ही "यह केसर है" ऐसे लिखा हुआ लाल मिर्च के पावडर का पॅकेट सबको नज़र आता है | साहिल और इंद्रवदन एक दूसरे की ओर देखते रहते हैं...
मॉनिशा: हायला... यह पॅकेट तो यहां है...
साहिल: वेरी गुड मॉनिशा... यू आर इम...
मॉनिशा: मेरा कोई कसूर नहीं है साहिल | सब कामाक्षी का कियाधरा है...
साहिल: कौन कामाक्षी...
मॉनिशा: अरे कामाक्षी कश्यप... "उसका पति सिर्फ मेरा है" सीरियल की मेन वॅम...
साहिल: उस कामाक्षीने डाली लाल मिर्च तुम्हारी खीर में...
मॉनिशा: नहीं साहिल, केसर का पॅकेट निकालने के लिए मैं फ्रिज खोल ही रही थी, कि कामाक्षी हाथ में चाकू लेकर बेडरूम की तरफ जाने लगी | आगे क्या होगा यह देखते देखते शायद गलती से...
इंदू: मॉनिशा, तुम्हारी इन्हीं लापरवाहियों की वजह से माया तुम्हें ताने मारती रहती है, गुस्सा करती है तुमपर...
मॉनिशा: मम्मीजी कैसी भी हों, लेकिन वह मुझसे बहुत प्यार करतीं हैं...
इंदू: अरे वह महामाया अपने और उस चंबूकुमार के अलावा और किसी से प्यार नहीं करती समझी...
मॉनिशा: नहीं डॅडीजी, मम्मीजी चाहे जैसीं भी हो, मगर वह मुझसे उतना ही प्यार करतीं हैं जितना की साहिल या सोनिया दीदी से...
इंदू: लगी शर्त...
इंदू मॉनिशा की ओर हाथ बढ़ाता है | मॉनिशा भी इंदू से हाथ मिलाती है...
मॉनिशा: हां लग गई...
साहिल: तो मॉनिशा, तुम्हें दो दिन में यह साबित करना है, कि मॉम तुमसे भी उतनाही प्यार करतीं हैं जितना की हम से...
इंदू: अगर तुम हार गई तो...
मॉनिशा: तो... तो मैं लापरवाहियाँ करना और मम्मीजी की ज़ुबान में मिडल क्लास आदतें छोड़ दूँगी | लेकिन डॅडीजी, अगर आप हारे तो...
इंदू: तो मैं रोसेश को घर से निकाल दूँगा...
मॉनिशा: नहीं डॅडीजी, आप सिर्फ मान जाइये, कि मम्मीजी सबसे प्यार करतीं हैं...
इंदू: डन...
इंदू फिर से हाथ बढ़ाता है और मॉनिशा इंदू से हाथ मिलाती है | इस बार उन दोनों के हाथ पर साहिल अपना हाथ रखता है...
फ्लॅशबॅक सीन ५ खत्म हुआ...
सीन ४ फिर से शुरू होता है...
साहिल के घर का ड्रॉईंग रूम...
मॉनिशा: फिर मैंने, साहिल और डॅडीजी के साथ मिलकर प्लॅन बनाया | मुझे दोन दिन तक आपसे छुपना था | तय यह हुआ, कि मैं पहले अपने लिए खाने-पीने का इंतज़ाम करूँगी और घर में छुप जाऊँगी | फिर साहिल आपके पास आकर मेरे घर छोड़ने की बात करेगा | तो मैं गोविंदराम फरसाण मार्ट चली गई...
रोसेश: गोविंदराम फरसाण मार्ट क्यौं... होम डिलिवरी से मंगा लेती थी ना आप...
मॉनिशा: ओ हो रोसेश भैया... गोविंदराम सस्ता पड़ता है | तो मैं जैसे ही बिल्डिंग के बाहर आई, सामने से मुधूफूफा चले आ रहे थे | उन्हें देखकर मैं डर गई | सामने से बस आ रही थी तो उस बस में चढ़ गई और अगले ही स्टॉपपर उतर गई | मैं जहां उतरी वहां एक होटल में हरिचाचा और मदन भैया चाय पी रहे थे | मैंने तुरंत डॅडीजी को फोन किया | डॅडीजी ने इन दोनों को भी प्लॅन में शामिल कर लिया | इन दोनों के पीछे पीछे छुपकर में घर आ गई | आते ही मैं आईस्क्रीम खाने लागी...
सोनिया: ठंडा ठंडा और मुह का खुलना-बंद होना... देखा...
मॉनिशा: आईस्क्रीम खाते खाते मैं टी. व्ही.पर कार रेसिंग भी देख रही थी...
सोनिया: फॉर व्हीलर... देखा...
मॉनिशा: आगे जो हुआ वह तो आपको पता ही है...
माया: ओह मॉनिशा बेटा... क्या ज़रूरत थी यह सब करने की... वैसे भी मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ा तुम्हारे ना होने से | उलटा मैं तो खुश हो रही थी...
इंदू: आहाहा... मायादेवी... अभी पांच मिनट पहले तो अपने कमरें में उदास हो गई थी तुम...
माया: वह तो मैं... कमरे में... तुम्हें कैसे पता...
इंदू: कन्सील्ड माईक और कॅमरेसे... आवर रूम वॉज बग्ड माया...
माया की बड़ी होती आँखें देखकर उसके कान के पास आकर इंदू कहता है...
इंदू: डोंट वरी माया | कल रात को माईक और कॅमरा बंद थे...
इंदू की पीठ थपथपाकर सबकी तरफ मुड़कर माया कहती है...
माया: एनीवेज आय एडमिट... मॉनिशा के ना होने से मैं थोड़ी परेशान ज़रूर हुई थी...
साहिल: यह दोनों जैसी भी हों, एक दूसरे के लिए बहुत प्यार है इन्हें...
रोसेश: धिस कॉल्स फॉर अ सेलिब्रेशन... हम अपना वही गाना गाकर इस मोमेंट को सेलिब्रेट करें...
इंदू, माया, साहिल, मॉनिशा: येस...
सोनिया, दुश्यंत, मधूभाई, हरी और मदन पास खड़े तालियाँ बजा रहे हैं | इंदू, माया, साहिल, मॉनिशा और रोसेश नाचने लगते हैं | इंदू और साहिल गाने लगते हैं...
इंदू और साहिल: यह जो नज़र आते हैं... यह वह तो है नहीं... देखो इन्हें प्यार से... तो दिखेंगे यह और कोई...
माया और मॉनिशा: ज़ुबान से ओ माय माय कितने प्यारे है... दिलों में यू डोंट नो वह अंगारे हैं...
इंदू: सोफेस्टिकेशन इनकी सरनेम है...
साहिल: हिपॉक्रसी में जीते यह सारे हैं...
मॉनिशा: इक पल में बनती है पल में बिगड़ती है...
माया: यू कांट से व्हेन, हाऊ और व्हाय...
इंदू और माया एकसाथ डान्स करते हैं तो साहिल और मॉनिशा एकसाथ डान्स करते हैं…
चारों एकसाथ: साराभाई व्हर्सेस साराभाई... साराभाई...
अकेला खड़ा रोसेश सबको देख रहा है | फिर पैर ज़मीन पर पटककर...
रोसेश: व्हर्सेस साराभाई...
दी एंड.
@ अनिकेत परशुराम आपटे.
इंद्रवदन, मधूभाई और सोनिया सोफे पर बैठे हैं | दुश्यंत सी.डी. प्लेयर को चेक करने में जुटा हुआ है | साहिल, माया और रोसेश किचन के पास खड़े हैं…
माया: साहिल, हमें पुलीस स्टेशन जाना होगा...
साहिल: मॉम मॉम मैंने इंस्पेक्टर स्वामी से बात की है | वह मॉनिशा को ढूँढ़ने में हमारी मदद करेंगे...
तभी साहिल की नज़र दरवाजे में खड़े हरी और मदन की ओर जाती है...
साहिल: अरे, मदन और हरी... तुम लोग कब आए...
रोसेश: यह दोनों इंडिया वापस आ गए हैं साहिल भाई | मुझसे मिलने आए है यहां...
इंदू: अबे चंबू, मॉनिशा के बारे में सोच इडियट...
मधूभाई: डायट... मॉनिशा डायट करने लगी है... लेकिन क्यौं...
माया: माय गॉड तुम लोग यह क्या बातें कर रहे हो... साहिल, मॉनिशा को...
तभी फोन की घंटी बजती है | माया फोन उठाती है...
माया: हॅलो, साराभाईज रेसि... मॉनिशा का घर... येस... कौन रामप्यारे... हां हां सेवपूरीवाले भैया... हां बोलिये... अच्छा... लेकिन अब क्या फायदा... जिसके लिए आपने फोन किया है, वह तो अब... बेटर लक नेक्ट टाईम भैया...
माया फोन काट देती है | सब लोग माया की ओर देखते हैं...
माया: रामप्यारे भैया का फोन था | वही, जिसकी पानीपूरी खाकर जाँडीस होता है | वह कह रहा था, उसने अपने रेग्यूलर कस्टमर्स के लिए आज एक घंटे के लिए स्कीम निकाली है | दो प्लेट सेवपूरी के साथ एक प्लेट सेवपूरी फ्री | इस स्कीम की शुरूवात वह मॉनिशा से करना चाहता है और अपना ठेला लेकर के वह बिल्डिंग के बाहर खड़ा है | लेकिन मॉनिशा तो... इसलिए वह जा रहा है, किसी दूसरे के साथ स्कीम की शुरुवात करने...
तभी बेडरूम का दरवाजा खुलता है और मॉनिशा चिल्लाते हुए बाल्कनी की तरफ भागती है...
मॉनिशा: अरे भैयाजी... रुकिये... मैं यहीं हूँ...
मॉनिशा बाल्कनी से झाँकती है | फिर धीरे धीरे मुड़ती है और साहिल के पास आकर खड़ी हो जाती है...
मॉनिशा: मेरी कोशिश बेकार गई... साहिल, तुमने बताया ना...
माया: नहीं | इस बार भी मैं ही समझ गई... हमेशा की तरह यहां हॉल में कपड़ों का exhibition नहीं लगा था, इसका मतलब मॉनिशा वहीं कपड़े लेकर के use कर रही थी | किचन शेल्फपर वड़ा-पाव के पॅकेट रखे हुए हैं | साहिल मॉनिशा से कितना ही प्यार क्यौं ना करता हो, लेकिन अकले में वह वड़ा-पाव ज़रूर नहीं खाएगा | And and... शादी से पहले मॉनिशा की सिर्फ बात करते वक्त रोनेवाला मेरा साहिल, आज मॉनिशा के गायब होनेपर भी calm था, composed था | तब मुझे यकीन हो गया, कि दाल में कुछ... मेरा मतलब है शीरे में कुछ गरम मसाला है... और मॉनिशा बेटा, से द प्लॅन हॅज फेल्ड... कोशिश बेकार हो गई कहना इज टू डाऊन मार्केट... इसलिए मैंने फोन का नाटक किया...
मधूभाई: ए इंदू, यह रही मॉनिशा | पर यह तो घर पर ही है... फिर मैंने जिसे बस में चढ़ते हुए देखा वह कौन थी...
दुश्यंत: वह कौन थी... नाईस मूव्ही... ब्लॅक एँड व्हाईट थी | अगर कलर में होती तो इतना इफेक्ट नहीं आता... आय विल एक्सप्लेन... मान लो, कि रोसेश...
माया: ओह कट इट आऊट दुश्यंत | मॉनिशा बेटा, अब बता भी दो व्हॉट्स द कॅच...
मॉनिशा: मुझे माफ कर दिजिए मम्मीजी | डॅडीजी के साथ लगी एक शर्त की वजह से मुझे यह सब करना पड़ा...
फ्लॅशबॅक शुरू होता है...
फ्लॅशबॅक - सीन ५ - मॉनिशा का घर...
मॉनिशा किचन में कुछ बना रही है | साहिल सोफे पर बैठा पेपर पढ़ रहा है | तभी इंद्रवदन वहां आता है...
इंदू: हाय मॉनिशा... क्या बना रही हो...
मॉनिशा: हाय... खीर बना रही हूँ | साहिल आज घर पर है ना, तो सोचा कुछ मीठा बना लूँ | जरा टेस्ट कर के बताइये ना कैसी बनी है...
साहिल: (धीमी आवाज में...) मर गए...
दो छोटे बाऊल में खीर डालकर मॉनिशा बाऊल को टेबल पर रखती है | इंदू और साहिल किचन के पास जाते हैं और बाऊल में झाँकते हैं...
इंदू: लेकिन मॉनिशा, इस खीर का रंग लाल क्यौं है...
मॉनिशा: वह, केसर डाला है ना... तो उसका लाल रंग आया होगा...
तभी इंद्रवदन टेबल पर पड़े लाल मिर्च के खाली पॅकेट को देखकर चौंक जाता है | फिर थोड़ी खीर टेस्ट करता है | चम्मच मुँह में ही रखकर इशारे से पानी माँगता है | पूरे दो ग्लास पानी पीने के बाद...
इंदू: हाश... मॉनिशा, तुमने इस खीर में लाल मिर्च के पावडर का पूरा पॅकेट उड़ेल दिया क्या...
मॉनिशा: क्या... मैंने तो केसर समझकर...
इंदू: केसर समझकर लाल मिर्च का पावडर... वाह...
मॉनिशा: हां | मेरी गुरिंदर मौसीने पिछले हफ्ते केसर भेजा था ना... कोई डिब्बा खाली नहीं था | इसलिए मैंने केसर को लाल मिर्च की पावडर के खाली पॅकेट में भरकर पॅकेट फ्रिज में रख दिया...
कहते कहते मॉनिशा फ्रिज खोलती है और दरवाजे में ही "यह केसर है" ऐसे लिखा हुआ लाल मिर्च के पावडर का पॅकेट सबको नज़र आता है | साहिल और इंद्रवदन एक दूसरे की ओर देखते रहते हैं...
मॉनिशा: हायला... यह पॅकेट तो यहां है...
साहिल: वेरी गुड मॉनिशा... यू आर इम...
मॉनिशा: मेरा कोई कसूर नहीं है साहिल | सब कामाक्षी का कियाधरा है...
साहिल: कौन कामाक्षी...
मॉनिशा: अरे कामाक्षी कश्यप... "उसका पति सिर्फ मेरा है" सीरियल की मेन वॅम...
साहिल: उस कामाक्षीने डाली लाल मिर्च तुम्हारी खीर में...
मॉनिशा: नहीं साहिल, केसर का पॅकेट निकालने के लिए मैं फ्रिज खोल ही रही थी, कि कामाक्षी हाथ में चाकू लेकर बेडरूम की तरफ जाने लगी | आगे क्या होगा यह देखते देखते शायद गलती से...
इंदू: मॉनिशा, तुम्हारी इन्हीं लापरवाहियों की वजह से माया तुम्हें ताने मारती रहती है, गुस्सा करती है तुमपर...
मॉनिशा: मम्मीजी कैसी भी हों, लेकिन वह मुझसे बहुत प्यार करतीं हैं...
इंदू: अरे वह महामाया अपने और उस चंबूकुमार के अलावा और किसी से प्यार नहीं करती समझी...
मॉनिशा: नहीं डॅडीजी, मम्मीजी चाहे जैसीं भी हो, मगर वह मुझसे उतना ही प्यार करतीं हैं जितना की साहिल या सोनिया दीदी से...
इंदू: लगी शर्त...
इंदू मॉनिशा की ओर हाथ बढ़ाता है | मॉनिशा भी इंदू से हाथ मिलाती है...
मॉनिशा: हां लग गई...
साहिल: तो मॉनिशा, तुम्हें दो दिन में यह साबित करना है, कि मॉम तुमसे भी उतनाही प्यार करतीं हैं जितना की हम से...
इंदू: अगर तुम हार गई तो...
मॉनिशा: तो... तो मैं लापरवाहियाँ करना और मम्मीजी की ज़ुबान में मिडल क्लास आदतें छोड़ दूँगी | लेकिन डॅडीजी, अगर आप हारे तो...
इंदू: तो मैं रोसेश को घर से निकाल दूँगा...
मॉनिशा: नहीं डॅडीजी, आप सिर्फ मान जाइये, कि मम्मीजी सबसे प्यार करतीं हैं...
इंदू: डन...
इंदू फिर से हाथ बढ़ाता है और मॉनिशा इंदू से हाथ मिलाती है | इस बार उन दोनों के हाथ पर साहिल अपना हाथ रखता है...
फ्लॅशबॅक सीन ५ खत्म हुआ...
सीन ४ फिर से शुरू होता है...
साहिल के घर का ड्रॉईंग रूम...
मॉनिशा: फिर मैंने, साहिल और डॅडीजी के साथ मिलकर प्लॅन बनाया | मुझे दोन दिन तक आपसे छुपना था | तय यह हुआ, कि मैं पहले अपने लिए खाने-पीने का इंतज़ाम करूँगी और घर में छुप जाऊँगी | फिर साहिल आपके पास आकर मेरे घर छोड़ने की बात करेगा | तो मैं गोविंदराम फरसाण मार्ट चली गई...
रोसेश: गोविंदराम फरसाण मार्ट क्यौं... होम डिलिवरी से मंगा लेती थी ना आप...
मॉनिशा: ओ हो रोसेश भैया... गोविंदराम सस्ता पड़ता है | तो मैं जैसे ही बिल्डिंग के बाहर आई, सामने से मुधूफूफा चले आ रहे थे | उन्हें देखकर मैं डर गई | सामने से बस आ रही थी तो उस बस में चढ़ गई और अगले ही स्टॉपपर उतर गई | मैं जहां उतरी वहां एक होटल में हरिचाचा और मदन भैया चाय पी रहे थे | मैंने तुरंत डॅडीजी को फोन किया | डॅडीजी ने इन दोनों को भी प्लॅन में शामिल कर लिया | इन दोनों के पीछे पीछे छुपकर में घर आ गई | आते ही मैं आईस्क्रीम खाने लागी...
सोनिया: ठंडा ठंडा और मुह का खुलना-बंद होना... देखा...
मॉनिशा: आईस्क्रीम खाते खाते मैं टी. व्ही.पर कार रेसिंग भी देख रही थी...
सोनिया: फॉर व्हीलर... देखा...
मॉनिशा: आगे जो हुआ वह तो आपको पता ही है...
माया: ओह मॉनिशा बेटा... क्या ज़रूरत थी यह सब करने की... वैसे भी मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ा तुम्हारे ना होने से | उलटा मैं तो खुश हो रही थी...
इंदू: आहाहा... मायादेवी... अभी पांच मिनट पहले तो अपने कमरें में उदास हो गई थी तुम...
माया: वह तो मैं... कमरे में... तुम्हें कैसे पता...
इंदू: कन्सील्ड माईक और कॅमरेसे... आवर रूम वॉज बग्ड माया...
माया की बड़ी होती आँखें देखकर उसके कान के पास आकर इंदू कहता है...
इंदू: डोंट वरी माया | कल रात को माईक और कॅमरा बंद थे...
इंदू की पीठ थपथपाकर सबकी तरफ मुड़कर माया कहती है...
माया: एनीवेज आय एडमिट... मॉनिशा के ना होने से मैं थोड़ी परेशान ज़रूर हुई थी...
साहिल: यह दोनों जैसी भी हों, एक दूसरे के लिए बहुत प्यार है इन्हें...
रोसेश: धिस कॉल्स फॉर अ सेलिब्रेशन... हम अपना वही गाना गाकर इस मोमेंट को सेलिब्रेट करें...
इंदू, माया, साहिल, मॉनिशा: येस...
सोनिया, दुश्यंत, मधूभाई, हरी और मदन पास खड़े तालियाँ बजा रहे हैं | इंदू, माया, साहिल, मॉनिशा और रोसेश नाचने लगते हैं | इंदू और साहिल गाने लगते हैं...
इंदू और साहिल: यह जो नज़र आते हैं... यह वह तो है नहीं... देखो इन्हें प्यार से... तो दिखेंगे यह और कोई...
माया और मॉनिशा: ज़ुबान से ओ माय माय कितने प्यारे है... दिलों में यू डोंट नो वह अंगारे हैं...
इंदू: सोफेस्टिकेशन इनकी सरनेम है...
साहिल: हिपॉक्रसी में जीते यह सारे हैं...
मॉनिशा: इक पल में बनती है पल में बिगड़ती है...
माया: यू कांट से व्हेन, हाऊ और व्हाय...
इंदू और माया एकसाथ डान्स करते हैं तो साहिल और मॉनिशा एकसाथ डान्स करते हैं…
चारों एकसाथ: साराभाई व्हर्सेस साराभाई... साराभाई...
अकेला खड़ा रोसेश सबको देख रहा है | फिर पैर ज़मीन पर पटककर...
रोसेश: व्हर्सेस साराभाई...
दी एंड.
@ अनिकेत परशुराम आपटे.

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