Sarabhai vs Sarabhai - Family Picnic...
Scene 2 - कार पार्किंग...
पार्किंग में एक मिनी ट्रॅवलर बस खड़ा है | ईलाबेन बस के अंदर बैठी है | रोसेश, मधुभाई और दुष्यंत बस के बाहर दरवाजे के पास खड़े हैं…
रोसेश: पता नहीं लेडीज को इतना टाईम क्यों लगता है | मॉमा जल्दी नीचे आइये ना... और कितना वेट करेंगे हम...
दुष्यंत: वेट, वेट... रोसेश तुम समझे... किसी का वेट करना और पानी से वेट होना... I'll give another example... let and late...
मधुभाई: हैं...
रोसेश: Ohh cut it out Dushyant...
ईलाबेन: (इशारे करते हुए मधुभाई को कहती है...) ए जी, इंदू को फोन करो ने | जल्दी बुला लो नीचे...
मधुभाई: इंदू को फोन करके नीचे बुला लूँ... हां हां...
मधुभाई फोन निकालते हैं, तभी लिफ्ट का दरवाजा खुलता है और सब लोग बाहर आते हैं...
मधुभाई: ए ईला, देख इंदू आ गया | ए इंदू... इतनी देर कैसे हो गई...
इंदू: (पाँच उंगलियाँ दिखाते हुए...) सिर्फ पाँच मिनट लेट हुए हैं मधुभाई...
मधुभाई: क्या, पाँचवा महिना... किसे...???
इंदू: अरे बहरेलाल, इशारे तो ठिक से समझिये...
साहिल: आप दोनों अपना यह discussion बस में करेंगे, हम लेट हो रहे हैं...
सब बस में बैठ जाते हैं | रोसेश दरवाजे के पास ही खड़ा है |
मॉनिशा: रोसेश भैय्या, अंदर आइये ना | कंडक्टर की तरह दरवाजे के पास क्यों खड़े हैं...!!! और अंदर आते वक्त बस की मीटर रीडिंग भी लेते आना हां...
माया: मॉनिशा प्लीज | मीटर रीडिंग लेना is so travellistically middle class. रोसेश स्विटी क्या बात है, ऐसे क्यों खड़े हो...!!
रोसेश: मैं किसी का वेट कर रहा हूँ | हमारे पिकनिक के स्पेशल गेस्ट...
इंदू: कहीं तुमने हायना पालनेवाली उस मछली की बदबू, मेरा मतलब है मॅगी को तो नहीं बुलाया ना...
मधुभाई: हैं...
साहिल: या फिर 27 caninesवाली यूयू आ रही है...!!
मॉनिशा: हायला, तब तो हमारी बस बिलकूल चलता-फिरता झू लगेगी | जानवर दिखाकर हम लोगों से पैसे भी ले सकते हैं...
इंदू: वाह वाह वसुलादेवी वाह...
मधुभाई: हैं...
रोसेश: नहीं मॉनिशा भाभी | उन दोनों में से कोई नहीं आ रही | मैंने तो...
तभी रोसेश सामने देखकर कहता है...
रोसेश: Here they come...
सब लोग उस तरफ देखते हैं तो कच्चा केला, अमरत्वांशू और रमेश (यमराज) सामने से चलकर आ रहे हैं |
रमेश: (माया को देखकर...) हाय माया...
माया: आय स्टिल हेट यू...
सब लोग हँसते हैं और रमेश बस के अंदर चला जाता है…
इंदू: हाय अमर...
अमरत्वांशू: Excuse me... Its Amaratvanshu... Say hi Amaratvanshu...
मधुभाई: हैं...
इंदू: अरे हैं हैंचंद, आप हमेशा मेरे बोलने पर ही हैं हैं हैं हैं क्यों करते हैं...!
मधुभाई: यहाँ थूँकू... ना रे बस गंदी हो जाएगी...
इंदू: माया, मैं इनको बस के पीछे बाँध दूँ क्या... और complicated नामवाले, तेरा नाम इतना गड़बड़वाला है कि बोलते बोलते मैं अपना नाम भूल जाऊँगा...
साहिल: Exactly... चलो अमर अंदर आ जाओ…
अमरत्वांशू: I said Amaratvanshu... Say Amaratvanshu...
साहिल: हां हां वही | चलो अंदर आ जाओ | कच्चे केलेजी, आप भी अंदर आ जाइये | बाहर मत लटकिये...
मॉनिशा साहिल को कोनी मारती है...
साहिल: मेरा मतलब है, अंदर आइये...
सब लोग बैठ जाते हैं और बस चल पड़ती है |
End of the scene. Cut to inside moving bus...
Scene 3 - बस के अंदर...
बस चल रही है | थोड़ी देर बाद ईलाबेन और मधुभाई सो जाते हैं | कुछ समय बाद साहिल खड़ा होकर सबसे कहता है...
साहिल: Ok now everybody listen... हम दो दिन के लिए लोनावला जा रहे हैं | दो घंटों का सफर है | तो अब क्या करें...
रोसेश: मैंने पिकनिक पर कविता लिखी है, सुनिये...
इंदू: रोसेश नहीं | अगर कविता सुनाई तो उठाकर बाहर फैंक दूँगा...
मधुभाई: हैं...
माया: छोटासा ही तो काग़ज़ है इंदू और कविता भी तो...
इंदू: कागज़ नहीं रोसेश को बाहर फैंक दूँगा...
दुश्यंत: कैसे बाहर फैंकेंगे डॅड... main door से या emergency door से... क्योंकि इस बस के emergency door के handle का suspension jam हो गया है...
मधुभाई: हैं...
दुश्यंत: I'll explain... मान लो, रोसेश handle का suspension है | रोसेश, तुम jam हो जाओ...
माया: Stop it दुश्यंत... कोई किसी को कहीं नहीं भेज रहा है...
साहिल: Exactly. अब कोई बताएगा हम क्या करें...
मॉनिशा: हम अंताक्षरी खेलते हैं...
माया: Dumsharads मॉनिशा... अंताक्षरी sounds so bollywood style middle class...
मॉनिशा: बैठे बैठे क्या करें, करना है कुछ काम... शुरू करें अंताक्षरी, लेकर प्रभू का नाम | साहिल, तुमपर ‘म’ आया...
साहिल: मैं तो रस्ते से जा रहा था... मैं तो भेलपुरी खा रहा था......... नानी मरी तो मैं क्या करू...
गाना सुनकर माया साहिल को गुस्से से देखती है | फिर एक एक करके सब गाना गाते हैं | अंत में इंद्रवदन की बारी आती है | वह जैसे ही गाना खत्म करता है, मधुभाई और ईलाबेन की नींद खुल जाती है...
मधुभाई: ए इंदू... ऐसे हाथ हिलाकर क्या कर रहा है...
इंदू: मधुभाई, मैंने गाना गाया...
मधुभाई: खाना... अरे इंदू, खाना तो लोनावला पहुँचकर खाएँगे... यहाँ नहीं...
इंदू: ईलाबेन, please take over...
ईलाबेन: (हँसकर मधुभाई से...) ए जी, इंदू कह रहा है उसने अंताक्षरी में गाना गाया...
मधुभाई: क्या, इंदूने गाना गाया... तो ऐसे बोल ना... न जाने अगडम बगडम बोलना कब छोड़ेगा इंदू...
इंदू: माया, इनको किसीने बिठाकर इशारे करके समझाया नहीं, कि यह पूरी तरह बहरे हैं...
माया: Stop it इंदू... अनिरुद्ध, हमने सुना है तुम्हारी कविता को अवॉर्ड मिला है... प्लीज, हमें सुनाओ ना...
कच्चा केला: अब माया इतना फोर्स कर रही है, then तो फिर I तो will have to recite... कविता का नाम है, "मैं बेवकूफ हूँ...
इंदू: परफेक्ट...
कच्चा केला अपनी कविता सुनाता है | सब ताली बजाते हैं |
मधुभाई: ए इंदू, इसने क्या बोला... सब ताली क्यों बजा रहे रहें...
इंद्रवदन मधुभाई को अनसुना कर देता है...
ईलाबेन: (हँसकर...) ए जी, इन्होंने कविता सुनाई...
रमेश: यह कविता थी या इस केले की autobiography...
इंद्रवदन हँसने लगता है और रमेश को ताली देता है |
कच्चा केला: (थोड़ा गुस्से में...) यह कविता थी ओके... This was my one of the best... और इसके लिए मुझे award भी मिला है...
रमेश: वो award कविता सुनाने के लिए था या आगे से कविता ना सुनाने के लिए था...
रमेश की बात पर इंदू और जोर से हँसता है और फिर से रमेश को ताली देते हुए कहता है...
इंदू: अरे जियो यमराज जियो... तुम्हें माया की भी उम्र लग जाए...
यह बात सुनकर कच्चा केला और गुस्से में आ जाता है | माया उसे शांत करने लगती है तब रमेश मॉनिशा से कहता है...
रमेश: By the way मॉनिशा... मेरे यमराज के गेट-अप के तीन सौ रुपये में से आप आधा देनेवाली थी ना...
मॉनिशा: रमेशजी... इस पिकनिक के पैसे आपसे नहीं लिये | तो adjust हो गया ना...
माया: मॉनिशा प्लीज... यूँ adjustment करना is horribly middle class... तुम...
तभी माया सोनिया को देखती है | सोनिया एक दिशा में देखते हुए खो गई है…
माया: क्या बात है बेटा... ऐसे क्यों घूर रही हो मॉनिशा को...
सोनिया: मैं मॉनिशा भाभी को क्यों घूर के देखूँगी मॉम... मुझे फिर से वही व्हिजन्स आ रहे हैं... कोई लेटा हुआ है | कुछ लोग घेरा बनाकर खड़े हैं...
माया: ओह सोनिया तुम्हारे व्हिजन्स...
दुश्यंत: नहीं मॉम... सोनिया के व्हिजन्स पॉवरफूल होते हैं... अब कल ही सोनियाने देखा, कि मैं टॅक्सी से सफर कर रहा हूँ... और आज सुबह हम यहाँ आने के लिए निकले तो देखा, हमारी गाड़ी के ब्रेक और accelerator दोनों फेल हो गये | I'll explain... मान लो रोसेश break है और अमर accelerator... अब आप दोनों फेल हो जाओ...
अमरत्वांशू: Excuse me... Its Amaratvanshu... Say Amaratvanshu...
रोसेश: Cut it out Dushyant... हम जानते हैं break और accelerator फेल कैसे होते हैं ओके...
साहिल: (सब की तरफ देखकर...) Everyone, हम पहुँच गये... चलिए रेडी हो जाइये... सब अपना अपना समान उठाएँगे... डॅड, आप भी...
इंदू: मैं मर्द हूँ...
साहिल: वह तो मैं भी हूँ डॅड, फिर भी...
बस एक गेट के अंदर आती है और एक बड़े से कॉटेज के सामने आकर रुकती है...
End of the scene. Cut to cottage...
Scene 4 - कॉटेज...
सब लोग बस से उतरकर कॉटेज के सामने खड़े हो जाते हैं |
मॉनिशा: हायला... कितना प्यारा बंगला है ना साहिल...
माया: से कॉटेज मॉनिशा... बंगला sounds so residentially middle class...
मॉनिशा साहिल को देखती है | साहिल उसे इशारे से समझाता है | तभी माया का फोन बजता है...
माया: हाय सरिता... हां हम अभी पहुँचे | Its a lovely cottage I must say... Thank you सरिता...
फोन बंद हो जाता है | अमरत्वांशू कॉटेज को देख रहा है...
कच्चा केला: क्या हुआ अमर...
अमरत्वांशू: Excuse me... Its Amaratvanshu ok...
रमेश: हां हां पर हुआ क्या... कॉटेज को ऐसे क्यों देख रहे हो...
अमरत्वांशू: मैं सोच रहा हूँ इस कॉटेज का P and T क्या होगा...
कच्चा केला: कम अगेन कम अगेन...
अमरत्वांशू: Pattern & Tone... मतलब, psychological levelपर हम इस घर को एक पिकनिक कॉटेज की तरह देख रहे हैं या at a general level, घर के बाहर रहने के लिए यहाँ आए हैं...
इंदू: Actually यह माया की फ्रेंड सरिता का कॉटेज है और हम यहाँ एक दिन के लिए आराम करने आए हैं...
मधुभाई: काम... इंदू, तुझे यहाँ भी काम करना है... अरे, हम यहाँ आराम करने आए है बेवकूफ...
इंदू: माया देखो ना...
अमरत्वांशू: और आगे का IP क्या होगा...
रोसेश: IP as in...
अमरत्वांशू: IP... Itenary of the picnic...
रमेश: अरे complicated नामवाले... जैसा तेरा नाम complicated है, वैसीही तेरी जुबान भी...
साहिल: हॅल्लो... सब लोग... हम अंदर चलें...
सब लोग कॉटेज के अंदर जाते हैं...
बड़ा ही आलिशान कॉटेज है | ड्रॉइंग रूम में दो-तीन झूमर लटके हुए हैं | नीचे तीन-चार रूम्स हैं | ऊपर जाने के लिए एक सीढ़ी है | ऊपर भी दो-तीन कमरे हैं | सब लोग घर को निहार रहे हैं | थोड़ीही देर में ब्रेकफास्ट आ जाता है | सब लोग टेबलपर बैठ जाते हैं...
मधुभाई: ए इंदू... यह ले ब्रेकफास्ट... खा ले | कब से खाने की रट लगा रहे थे...
इंदू: बहरे आप हैं | हैं हैं हैं हैं आप करते हैं, और रट मैं लगाता हूँ...
मधुभाई: हैं...
रमेश: इंद्रवदन, तुम दोनों की जोड़ी खूब है हां...
इंदू: अरे ओ यमराज के ड्यूप्लीकेट... एक दिन के लिए तुझे इनके साथ रहना पड़े ना तो मेरा दुख समझ में आएगा...
कच्चा केला: Too many items for breakfast हां माया... व्हेरी नाईस...
मॉनिशा: हां... और वह भी सिर्फ पचास रुपये में...
रमेश: पचास रुपये... मतलब हमें खाने के पैसे देने होंगे...
मॉनिशा: आप के लिए बिलकुल फ्री... पचास रुपये तो कच्चे केलेजी और अमरजी के लिए...
कच्चा केला: कम अगेन कम अगेन...
अमरत्वांशू: Excuse me again... Its Amaratvanshu ok...
माया मॉनिशा को गुस्से से देखती है तब साहिल मॉनिशा को कोने में ले जाता है...
साहिल: मॉनिशा क्या बोल रही हो तुम...
मॉनिशा: साहिल, उन तीनों को हम यहां तक तो ले आए | अब क्या खाना भी फ्री में खिलाएँगे...
साहिल: मॉनिशा वे तीनों हमारे गेस्ट हैं इस पिकनिक पर | इसलिए अब यह टॉपिक बंद | तुम जाओ और देखो रोसेश, सोनिया और दुश्यंत कहां रह गये...
मॉनिशा दुश्यंत और सोनिया के कमरे में पहुँचती है | वहां रोसेश भी बैठा हुआ है | दुश्यंत खिड़कियों का लॉक चेक कर रहा है...
रोसेश: कम ऑन दुश्यंत, ब्रेकफास्ट के लिए चलते हैं | बाद में घूमने भी जाना है...
दुश्यंत: इन खिड़कियों पर magnetic remote lock होना चाहिये था | उससे क्या होगा, कि बाहर से कोई इन्हें खोल ही नहीं पाएगा...
मॉनिशा: वह क्या होता है...
दुश्यंत: I'll explain, मान लो, कि मॉनिशा खिड़की है और रोसेश उसका लॉक है | अब मॉनिशा तुम बंद हो जाओ, और रोसेश तुम लॉक हो जाओ...
सोनिया: दुश्यंत, लॉक कैसे काम करता है, हम सब जानते हैं | अब चलो ब्रेकफास्ट के लिए...
चारों कमरे से बाहर निकलते हैं | इंद्रवदन चॉकलेट कुकी का डब्बा हाथ में लेकर गार्डन की तरफ जा रहा है | रोसेश उसे देखता है पर कुछ नहीं कहता | चारों टेबल पर पहुँचते हैं | घूँमने कहाँ जाना है इसके बारे में टेबल पर बात हो रही है...
कच्चा केला: हम भूशी डॅम चलते हैं...
अमरत्वांशू: राजमाची फोर्ट...
मधुभाई: मैं तो कमरे में आराम करनेवाला हूँ...
ईलाबेन: मैं भी | हम दोनों थक गये हैं ने...
तभी इंद्रवदन वहाँ आता है...
मधुभाई: ए इंदू... तुझे कहाँ जाना है...
इंदू: मुझे तो लोनावला लेक पर जाना है...
मधुभाई: केक... अरे हम घूँमने जाने की बात कर रहे हैं बेवकूफ... तुझे तो हर वक्त खाने की पड़ी है...
इंदू: माया, उसी लेक में इनका विसर्जन कर दूँ क्या...
साहिल: ओके गाईज... मैं मॅप लेकर आया हूँ | हम अभी निकलेंगे और डिनर तक वापस आएँगे | ईला बुआ और मधुफूफा, आपके दोपहर के खाने का इंतजाम कर दिया है | कम ऑन, सब लोग जल्दी चलिए...
ब्रेकफास्ट खत्म करके सब लोग अपने अपने कमरों में चले जाते हैं | थोड़ी ही देर में सोनिया-दुश्यंत, साहिल-मॉनिशा, इंदू-माया, कच्चा केला-अमरत्वांशू कपड़े बदलकर अपने अपने कमरों से बाहर निकलकर कॉटेज के बाहर की ओर चलने लगते हैं | बस के पास पहुँचते ही...
माया: रोसेश कहाँ है...
दुश्यंत: होगा यहीं कहीं...
बस से कुछ ही दूरी पर रोसेश और रमेश बात कर रहे हैं | उन्हें देखकर मॉनिशा कहती है...
मॉनिशा: वह देखिए रोसेश भैया | रोसेश भैया, रमेशजी, जल्दी आइये...
सब लोग बस में बैठ जाते हैं | बस चल पड़ती है | लोनावला में साईट देखते देखते, फोटो-व्हिडियो निकालते हुए वक्त गुज़र जाता है | शाम होते होते बस वापस आ जाती है...
End of the scene. Cut to cottage again...
Scene 5 - कॉटेज...
शाम ढल चुकी है | बस कॉटेज के अंदर पहुँच जाती है | सब लोग उतरते है | रात के खाने का समय हो चला है | सब लोग कॉटेज के अंदर आ जाते हैं | ईलाबेन और मधुभाई हॉल में बैठे टि.व्ही. देख रहे हैं | मधुभाई बार बार घड़ी देख रहे हैं...
मधुभाई: ईला, रात हो गई | यह लोग अबतक नहीं आए...
ईलाबेन: आ जाएँगे जी...
तभी ईलाबेन की नज़र दरवाजे की ओर जाती है | सब लोग अंदर आते दिख रहे हैं...
ईलाबेन: लो, यह लोग आ गये...
मधुभाई मुड़कर देखते हैं तो सामने से इंद्रवदन चला आ रहा है...
मधुभाई: ए इंदू, अच्छा हुआ तुम आ गये...
इंदू: क्यों...
मधुभाई: अरे मैंने कहा अच्छा हुआ तुम आ गये...
इंदू: (हाथों से इशारा करते हुए...) वही मैंने पूछा हैं हैं कुमार... क्यों...
मधुभाई: (अख़बार दिखाते हुए...) अख़बार पढ़के सुना ना... मेरा चष्मा मैं घर भूल आया...
इंदू: खुद को क्यों नहीं भूल आये बहरेलाल...
माया: ओह इंदू, स्टॉप इट... ईलाबेन, ज़रा सँभाल लेना हाँ... हम सब फ्रेश होकर आते हैं...
थोड़ी देर में सब डायनिंग टेबलपर आते हैं | खाना परोसा जा रहा है...
सोनिया: दुश्यंत कहाँ है...
रोसेश: आज मैं और मॉमा बच गये | दुश्यंत ने रमेश और अमर को बस के वायपर बना दिये और अब वायपर कैसे चलते हैं यह सिखा रहा है...
तभी अमरत्वांशू, रमेश और दुश्यंत वहाँ आते हैं...
दुश्यंत: अब मैं बुरा मान जाऊँगा ओके मि. रमेश...
सोनिया: क्या हुआ दुश्यंत...
रमेश: कुछ नहीं सोनिया, मैंने मज़ाक में दुश्यंत से कहा, कि उसे मेकॅनिकल कीड़े ने काट लिया है | तो गुस्सा में आ गया...
माया: ओके, चलो सब डिनर करते हैं | We all are too tired and hungry...
सब खाना खाने लगते हैं…
मधुभाई: ए इंदू आज क्या क्या किया... कहाँ कहाँ घूँमें बता ना...
इंद्रवदन ने मुँह खोला ही था, कि...
मधुभाई: हैं...
इंदू: अरे मुझे बोलने तो दिजिए हैं हैंचंद... हम बहुत जगह गये थे...
मधुभाई: हैं...
ईलाबेन: (इशारे करते हुए...) ए जी, इंदू ने कहा बहुत जगहों पर वे लोग घूँमें...
मॉनिशा: हां... कितना मज़ा या ना... और रमेशजी, अमर, अनिरुद्धजी और डॅडी के बींच competition भी हुआ...
अमरत्वांशू: Again... Its Amaratvanshu ok...
ईलाबेन: कैसा competition...
साहिल: पानीपूरी खाने का...
मॉनिशा: और रमेशजी ने डॅडीजी को पूरी तीन पानीपूरी से हराया | इस अमर और अनिरुद्धजी ने तो पाँच पाँच पूरी खाकर ही हार मानली...
अमरत्वांशू: Excuse me...
इंदू: हां, क्योंकि इस बार मॉनिशा ने रमेश का हौसला बढ़ाया ना... रमेशजी एक और... आपको यमराजजी के भैंसे की कसम...
कच्चा केला: मुझे इसपर नयी कविता सूझ रही है | मैं गोलगप्पा हूँ...
रमेश: इंद्रवदन, शायद तुम्हारे पेट को देखकर इन्हें यह टायटल सूझा होगा...
इंद्रवदन रमेश को गुस्से से देखता है | ऐसे ही हँसी-मज़ाक में डिनर खत्म होता है | सब लोग अपने अपने कमरों में जाते हैं...
थोड़ी ही देर में सब लोग डेझर्ट के लिए पूल पर मिलनेवाले होते हैं | सब तरफ शांती छाई हुई है | अचानक चीखने की आवाज़ सब तरफ घूँमती है...
End of the scene. Cut to pool side...
Scene 6 – Part 1 - पूल साईड़...
चीख सुनते ही सब लोग आवाज़ की ओर भाग आते हैं | सब पूल पर पहुँचते हैं तो देखते हैं, कि एक कोने में मॉनिशा बेहोश पड़ी है | साहिल तुरंत उसके पास आता है...
साहिल: मॉनिशा... उठो मॉनिशा... मॉनिशा...
मॉनिशा होश में आती है | वह कुछ बताना चाहती है पर उसके मुँह से आवाज़ नहीं निकल रही...
माया: मॉनिशा बेटा तुम यहाँ क्यों सो रही हो... हां, तुम्हारे बेड़पर तुम्हारा कपड़ों का बॅग होगा जो तुमने उठाया नहीं होगा... ओह, तुम्हारी यह मिडल क्लास आदतें...
इंदू: ओ मॉनिशा मुर्दाबाद एक्सप्रेस... वह काँप रही है डर के मारे | पहले उसे पूछो तो सही हुआ क्या...
साहिल: मॉनिशा क्या हुआ... तुम तो किचन में जा रही थी... तो यहाँ कैसे आई... और चीखी क्यों तुम...
कच्चा केला: किचन में... व्हाय मॉनिशा...
मॉनिशा: (खुद को सँभालते हुए...) कटलरी का प्राइझ देखने जा रही थी | तभी कोई ड्रॉईंगरूम से गुज़रा | कौन है देखने के लिए मैं यहाँ आई तो वहाँ... वहाँ...
मॉनिशा ने जिस तरफ उंगली दिखाई, सब लोग उस तरफ देखने लगे | पूल के पास ज़मीनपर कोई लेटा हुआ था | साहिल ने मॉनिशा को उठाया और सब लोग पूल के पास पहुँचे | वहाँ कोई पेट के बल लेटा हुआ था | कच्चा केला और दुश्यंत ने उसे पलटा | सब देखकर दंग रह गये...
रोसेश: ओ माय गॉड रमेश...
माया: क्या हुआ इसे...
दुश्यंत: लगता है यह मर गया है...
कच्चा केला: What are you saying दुश्यंत...
दुश्यंत: लगता है यह मर गया है...
सोनिया: ओ स्टॉप इट दुश्यंत... लेकिन, कोई लेटा है और सब लोग घेरकर खड़े हैं... देखा मेरा व्हिजन सही हुआ...
साहिल: पर हुआ क्या इन्हे...
मधुभाई: (रमेश की छाती पर कान लगाते हुए...) ए इंदू, इसके दिल की धड़कन बंद हो गई है... लगता है यह मर गया...
इंदू: अरे बहरेलाल, आपको अपनी धड़कन सुनाई नहीं देती तो इसकी कहाँ से सुनेंगे...
मधुभाई: हैं...
रोसेश: (रमेश का हाथ पकड़कर...) मॉमा, मि. रमेश इज गॉन...
माया: कैसे हुआ यह... अभी दस मिनट पहले तक तो ठिक थे...
साहिल: ठहरो मैं चक करता हूँ...
कच्चा केला: क्या होगा चेक करके... रमेश इज डेड... और माया यह एक मर्डर है...
ईलाबेन: सू बोले छे...
दुश्यंत: यही, कि यह मर्डर है...
सोनिया: दुश्यंत, Its just an expression...
तभी कच्चा केला रमेश के हाथ की ओर देखता है | हाथ खोलकर उसमें से एक चीज निकालता है और सबको दिखाता है...
कच्चा केला: यह कुकी रमेश के हाथ में थी | रमेश के होठ देखो, नीले हो गये हैं और इसके गलेपर भी strangulation के मार्क्स हैं...
रोसेश कुकी को देखता है | फिर आँखें बड़ी करते हुए कहता है...
रोसेश: यह कुकी तो डॅड के पास थी | ओ माय गॉड | दॅट मीन्स डॅड आपने...
माया: इंदू... तुमने किया यह...
इंदू: माया, मैं बकासूर हूँ...
मॉनिशा: बकासूर नहीं डॅडीजी, बेकसूर... आप बेकसूर हैं...
अमरत्वांशू: हां, बकासूर तो महाभारत में DD था...
सोनिया: मतलब...
अमरत्वांशू: Deadly demon...
रोसेश: और उसे तो भीम अंकल ने...
इंदू: मुझे याद है याद है याद है याद है... पार्ट टू... और तुम सब मुझे ऐसे क्यों घूर रहे हो... इस चंबू और दुश्यंत का झगड़ा हुआ था ना रमेश के साथ... और माया, वह भी तो नफरत करती थी रमेश से...
अमरत्वांशू: पर इसका MM क्या होगा...
कच्चा केला: कम अगेन कम अगेन...
अमरत्वांशू: Motive of the murder...
साहिल गौर से रमेश को देखता है | फिर उसकी जेब से कुछ निकालता है और इधर-उधर देखने लगता है | वहाँ रोते रोते मॉनिशा कहती है...
मॉनिशा: डॅडीजी, कोई कुछ भी कहे, मेरा दिल कहता है आप बेकसूर हैं...
माया: दिल कहता है... मॉनिशा... दिल कहता है इज bollywoodistically middle class... And besides, दिल कभी कभी ग़लत राय भी दे सकता है... साहिल के दिल को ही देख लो... Don’t mind बेटा, I am just making a point...
साहिल: और डॅड, यह आपने ही किया है, इसके प्रूफ मिले है...
इंदू: प्रूफ क्या... क्या प्रूफ...
साहिल: एक तो यह कुकी जो आपके अलावा यहाँ और कोई नहीं खाता | दूसरे, रमेशजी की जेब में मुझे यह कागज़ मिला...
सोनिया: इसमें क्या है साहिल भैया...
साहिल: डॅड की लिखी हुई 'सिनेमा उफ सिनेमा' यह कविता... और और, पूल के पास की झाड़ियों में मुझे यह जूते... इसे तो आप पहचानते होंगे... यह वही शूज हैं जिन्हें पहनकर आप चार बजे सायकलिंग करते थे... इनपर जो मिट्टी है, वही रमेशजी की पँटपर है... सो...
Scene 6 – Concluding Part - पूल साईड़...
मधुभाई: ए इंदू, यह सब क्या बात कर रहे हैं...
ईलाबेन: यही के इंदूने रमेस को मारा है...
मधुभाई: इंदू ने रमेश को मारा... ए ना रे... इंदू तो मच्छर भी नहीं मार सकता...
अमरत्वांशू: मच्छर नहीं LHB को मारा है ओके...
साहिल: LHB...
अमरत्वांशू: Living Human Being...
सोनिया: डॅड यह क्या किया आपने...
रोसेश: डॅड वेरी बॅड... इनको इन्हीं के पास पहुँचा दिया...
दुश्यंत: Please elaborate रोसेश...
रोसेश: यह यमराज बने थे ना... तो इनको ही यमराज के पास पहुँचा दिया...
कच्चा केला: मेरा बड़ा बच्चा अब नहीं रहा अच्छा...
माया: अब क्या होगा साहिल... लोग कहेंगे, मॉडर्न नारदमुनी ने मॉडर्न यमराज का मर्डर कर दिया...
साहिल: आय थिंक वी शूड कॉल द पुलीस...
इंदू: अरे तुम सब लोग क्या बकवास किये जा रहे हो... मैंने कुछ नहीं किया... साहिल, अपने डरे हुए बाप पर दया नहीं आ रही तुझे... पुलीस को बुला रहा है... अरे कुछ नहीं हुआ रमेश को... ए यमराज पार्ट टू... उठ...
मॉनिशा: यह नहीं उठेंगे डॅडीजी | यह तो परलोक सिधार गये | आज रात के लिए मैंने कितना अच्छा सोचा था... लेकिन डॅडीजी ने सब पर पानी फेर दिया...
माया: Say ruined मॉनिशा... सब पर पानी फेर दिया कहना is just so middle class... पर सोचा क्या था तुमने...
मॉनिशा: डॅडीजी और रमेशजी के बीच और एक competition. Ice cream खाने का... यह देखिए, रमेशजी की favorite Devils Delight ice cream भी लेकर आई थी... लेकिन अब...
Devils Delight का नाम सुनकर रमेश अपनी आँखें खोलता है और उठकर खड़ा हो जाता है...
रमेश: Devils Delight... कहाँ है... लाओ लाओ...
अमरत्वांशू: ओ माय गॉड... रमेशजी, आप तो मर गये थे ना...
रमेश: यह सब साहिल, रोसेश और मेरा एक नाटक था इंद्रवदन को डराने के लिए...
इंदू: I hate you duplicate यमराज...
साहिल: डॅड, पिकनिक में कुछ तो excitement होना चाहिए ना... Sorry रोसेश, तुम शर्त हार गये...
मॉनिशा: यह सब तुमने मुझसे छुपाया साहिल... आपनी सगी बिवी से... मैं घर छोड़कर जा रही हूँ...
रोसेश: मॉनिशा भाभी, हम घर से बाहर ही हैं ओके...
मधुभाई: ए इंदू, यह रमेश वापस जिंदा कैसे हुआ...
ईलाबेन: साहिल ने और रमेसजी ने मजाक किया इंदू के साथ...
मधुभाई: ओ अच्छा अच्छा...
कच्चा केला: साहिल, मेरा मझला बच्चा...
दुश्यंत: मतलब पुलीस नहीं आएगी... अब मैं उन्हें कैसे समझाऊँगा, कि उनका वॉकी-टॉकी कैसे काम करता है...
सोनिया: स्टॉप इट दुश्यंत...
अमरत्वांशू: AWTEW...
मॉनिशा: मतलब...
माया: It means All Is Well That Ends Well. Rite अमरत्वांशू... चलो ice cream खाते हैं...
सब लोग ice cream का पहला निवाला लेते हैं और तुरंत थूककर मुह बनाने लगते हैं...
इंदू: आ हां... अब आए सब ऊँट इस पहाड़ के नीचे... यह ice cream नहीं mashed potatoes हैं... Welcome to planet इंद्रवदन...
तभी बारा बजते हैं...
इंदू: And a very happy April Fools Day...
सब लोग एक साथ: A very happy April Fools day to all our fans...
The End.
@ अनिकेत परशुराम आपटे.